वह दिनभर विचारों और सपनो में खोये रहते है हम रोज न जाने कितने सपने देखते है। लेकिन उन सपनो को जमीन पर लाने के लिए कभी कभी कुछ भी नहीं करते है। हम खुद से यह भी नहीं पूछते की जो लछ्य किसी मिशन के तहत बनाये गए है। उनकी यतार्थ स्थिति क्या है? वर्तमान में यथार्थ पर हमारी नजर ही नहीं जाती है । इसलिए हम कभी यथार्थ को स्वीकर नहीं कर पाते। जिसके कारण हम असफल हो जाते है। जिससे बहुत सारी समस्याओं को हम बढ़ाते जाते है। इन परेशानियो की वजह हम अक्सर दुसरो को मानकर खुद को संतुष्ट कर लेते है या फिर नई समस्या कड़ी कर लेते है।
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