Thursday, 6 July 2017

डरना जरुरी है।

हमारे डर के जन्मदाता स्वयं हम है, इसलिए निर्भय होने की सबसे सहेज विधि है खुद को अलग करके तटस्थता से हर परिस्थिति का सामना करना।
जीवन में आने वाले कई नाजुक परिस्थियों में हम ठोस निर्णय लेने में खुद को असमर्थ पाते है, हम इस चिंता में रहते है की कही किसी को नाराज न कर दे।
इंसान डरता तब है, जब वह अपनी भावनाओ के बारे में इस्पस्ट नहीं जानता।
मूल रूप से हम डरते तब है जब हम कुछ चाहते पर उसे हासिल नहीं कर पाते है। या हमारे पास कुछ है और हम उसे खोना नहीं चाहते है।

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