Friday, 4 August 2017

प्रशंसा की जरुरत।

वह चाहकर भी दुसरो को प्रशंसा नहीं कर पाते । दरअसल उन्होंने जब भी अपने वरिष्ठ , अधिक सामाजिक आर्थिक हैसियत वालो की प्रशंसा को, उन्हें मक्खनबाज़ का तमगा पहना दिया गया। आखिरकार उन्होंने प्रशंसा करने से ही कन्नी काटनी शुरू कर दी। ऐसी स्थिती किसी के भी साथ हो सकती है।  प्रशंसा की जरुरत सबको है प्रत्येक व्यक्ति में सैकड़ो ऐसी  बातें है जिनकी प्रशंसा की जानी चाहिए। लेकिन हममे से तो ज्यादातर डरे रहते है की कही इसे गलत न समझ लिया जाये। हम यह नहीं समझ पाते की व्यक्ति जितना सफल हो जाये , प्रशंसा पाने की सोच हमेशा उस पर हावी रहती है। प्रशंसा में सच्चाई वैसी ही होनी चाहिए , जैसी बर्फ में सफेदी होती है और पानी में प्यास बुझाने की क्षमता । प्रशंसा तभी फलित होती है,जब वह उद्देश्यहीन हो। ऐसा करके, कुछ पाने की अपेक्षया न की जाये ।आपको जितना  अपेक्षया से दूर रहेगे आपको उतना ही लाभ होगा। सामने वाला आपके काम से ही नहीं आप के मान सम्मान से भी जुड़ेगा।

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