Sunday, 30 July 2017

बहस ही तो है।

बहस भी क्या चीज है? हम बहस करते है और मजा लेते है। कभी कभी हम बहस तो कर जाते है, लेकिन अपना मूड बिगाड़ बैठते है और मूड है की फिर लाइन पर नहीं आता । हम किसी के साथ होंगे या काम करेंगे तो बहस होगी ही। लेकिन वह हम पर इतनी हावी नहीं हो जानी चाहिए की हमारा पूरा दिन ही बर्बाद जाये। हम बातचीत करते है। कभी कभी बहस में बदल जाती है हम अपनी बात कहते है वह किसी को आहत कर जाती है।फिर कभी उसके उलट हम आहत हो जाते है । हम जब किसी बहस में आहत होते है।हमारा सारा मूड चौपट हो जाता हैं। फिर तो हमारा किसी काम में मन नहीं लगता। हम कोई काम आगे बढ़ा नहीं पाते । उस वक़्त हमे ठीक से सोचने की जरुरत होती है। आखिर एक ही ख्याल के साथ हम बहुत देर तक चिपके भी नहीं 

जीवन संघर्ष नहीं सहयोग है।

अधूरेपन का सम्मान जरुरी है जिंदगी का पूरा मतलब है अधूरापन। ऐसा कोई नहीं है, जिसे अपना मनचाहा मिल सकता हो। यहाँ तक की बुद्धि से परे पशु पश्चियों को भी वह हासिल नहीं होता , जिसकी खोज में वह होता है। हम लाख योजनाओ की तयारी करे फिर भी विफलता को सार्थक रूप में समझने की तैयारी अधूरी ही है। आपने जो चीज पाई है, उसके प्रति श्रद्धानत हो, तो जीवन की सार्थकता महसूस हो सकती है। अपने पाये खोये का हिसाब करने बैठे तो इस बात पर ध्यान फोकस करे की वह क्या है, जो आपको मिला तो आपकी आँखों में चमक आ जायेगी? पता चलेगा की आपके हिस्से बहुत कुछ है,जो दुसरो के पास नहीं है। हमे खोये को भूलने की कला आनी चाहिए और पाने के प्रति कृतज्ञता की भावना रखनी चाहिए।

Commitment यानि दृढ़ इच्छा


  1. कामयाबी उसे हासिल होती है,जिसमे target प्राप्त करने की दृढ इच्छा होती है । आपकी कामयाबी आपके विचारो व फैसलो का परिणाम होती है। वचनबद्धता आपके दिमाग में target के प्रति दबाव ,अनुभव,अनुराग व उत्साह पैदा करती है। यह ताकत आपको कामयाबी की ओर कदम बढ़ाने को प्रेरित करती है। दरअसल , target के प्रति वचनबद्धता आपको एक target के लिए काम करने को बाध्य करती है। यह आंतरिक सकती है, जो व्यक्ति के अंतर्मन से उत्पन्न होती है। वास्तव में commitment एक बंधन है। यह अदृश्य दबाव है। चाहत व दृढ विश्वास में काफी अंतर है। जहा चाहत की दिशा बदल सकती है वही दृढ़ विश्वास अपनी निर्धारित दिशा में कायम रहता है। इंसान के जीवन की क्वालिटी उसके बेहतर काम करने की commitment पर depend करती है, फिर चाहे उसका कार्यक्षेत्र कुछ भी क्यों न हो।